भारत के जीडीपी में लगभग चार प्रतिशत योगदान ब्लू इकोनामी का है। देश का लगभग 96 प्रतिशत व्यापार समुद्र के रास्ते से होता है। भारत एक लंबी तटरेखा वाला देश है, जिसके पास 7,517 किमी लंबी समुद्री तट रेखा है। जो करीब 22 लाख वर्ग किमी में फैला एक्सक्लूसिव इकोनामिक जोन है।
2047 तक भारत सरकार का लक्ष्य मैरिटाइम सेक्टर के 4% जीडीपी योगदान को बढ़ाकर 12% तक ले जाना है। इसके लिए भारी निवेश की आवश्यकता होगी । जो भारत के अर्थव्यवथा को सुधारने में अहम भूमिका निभाएगा यह ब्लू बांड।
ब्लू बांड काम कैसे करेगा।
ब्लू बांड बाजार से पैसा जुटाना का काम करेगी चाहे वह सरकारी बैंक हो या प्राइवेट सेक्टर हो । यह एक कर ( डेट इंस्ट्रूमेंट ) की तरह काम करेगा। इससे जो पैसा मिलेगा उसे केवल महासागरों के संरक्षण, मछली पालन, बंदरगाह और जलीय तटीय क्षेत्र के विकास के लिए किया जाएगा। केवल और केवल इस परियोजनाओं से जुड़े कामो के लिए इस पैसे का उपयोग किया जाएगा।
600 करोड़ से 1000 करोड़ तक का लक्ष्य

ब्लू बांड परियोजना का पहल सागरमाला फाइनेंस कॉरपोरेशन कर रही है। इस परियोजना के तहत पहले 600 करोड़ , फिर आगे चलकर 1000 करोड रुपए तक जुटाने का विचार किया गया है। ब्लू बांड की अवधि 10 साल की होगी। इसको एकरा और केयर जैसी एजेंसी से A++ की मजबूती रेटिंग प्राप्त है। जिससे निवेशकों के लिए यह काफी विश्वसनीय हो जाता है।
शेयर बाजारों में भारत इतिहास लिखने जा रहा है। जिस तरह पर्यावरण के सुरक्षा के लिए ग्रीन बॉन्ड ले आये जाते हैं। ठीक उसी तर्क पर ब्लू बांड को भी लाया गया है। इस नए वित्तीय साधन का मकसद समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र , जलीय तट और बंदरगाहों के बुनियादी ढांचे को मजबूत बनाना है। यह पूरी तरह से जल एवं समुद्र से जुड़ी परियोजनाओं पर आधारित है।
28 सितम्बर 2026 को इसे सागरमाला फाइनेंस कॉरपोरेशन भारत में लॉन्च करने जा रहा है। जो देश के अर्थव्यवस्था को सुधारने में अहम परियोजना हो सकती है।
पहला ब्लू बांड कब लाया गया था ।
2018 में सेसेल्स ने वर्ल्ड बैंक से मिलकर विश्व का पहला सावरेन ब्लू बांड को इंडोनेशिया में लांच किया गया था । जिसका अवधि 10 साल था, जो 2025 में संजय इशू बढ़कर 15.25 अरब डॉलर हो चुका है। विश्व बैंक के मुताबिक 70 अब डॉलर 2030 तक हो जाएगा ।