गुमशुदा बेटी की तलाश में परिणीति चोपड़ा : शक-ट्रस्ट नो वन

परिणीति चोपड़ा अपनी नई वेब सीरीज शक-ट्रस्ट नो वन से ओटीटी प्लेटफॉर्म पर डेब्यू कर रही हैं। ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुआ यह वेब सीरीज परिणीति का पहला ओटीटी प्लेटफॉर्म शो है, जिसमें उन्होंने एक मां का रोल किया है, जिसमें वो अपने खोई हुई बच्ची को ढूंढती हैं। यह कहानी सिर्फ एक खोई हुई बच्ची की नहीं है, यह कहानी भरोसे की है, कैसे एक मां बच्ची के पिता पर शक करती है, परिवार पर शक करती है, यहां तक कि पड़ोसियों पर भी शक करती हैं। जब आप इस वेब सीरीज को देखेंगे तो आपको खुद बच्ची के मां पर भी शक होने लगेगा।

शक-ट्रस्ट नो वन की कहानी

सीरीज की कहानी शिमला से शुरू होती है, जहाँ परिणीति चोपड़ा एक बेटी को जन्म देती हैं। इस वेब सीरीज में परिणीति चोपड़ा का नाम अन्विता है, लेकिन जब वे बच्ची को जन्म देती हैं, उसी दिन उनकी बच्ची अपेक्षा अस्पताल से गायब हो जाती है। राज भसीन, आलोक बन के उनके पति का अभिनय किए हैं। आलोक के संग अन्विता एक फैसला लेती है। कि जब तक उनकी बेटी वापस नहीं आती, वे हर वर्ष उसका जन्मदिन मनाएंगे।

हर साल जब वे लोग जन्मदिन मनाते हैं तो उनकी बेटी की एक तस्वीर मिलती है। इस तस्वीर ने अन्विता के जुनून को मरने नहीं दिया और यहीं से कहानी की शुरुआत होती है। आठ साल आगे कहानी बढ़ती है, अभी भी अन्विता अपनी बेटी की तलाश कर रही हैं। इस दौरान वह इलाज और कई थेरेपी से गुज़र रही हैं। धीरे-धीरे अन्विता के शक की सुई हर किसी की ओर घूमने लगती हैं।

 

शक-ट्रस्ट नो वनपरिणीति ने अन्विता के किरायेदार को बाखूबी परदे पर उतारा है। एक माँ का बच्चा गुम हो जाने पर जिस तरह का बेचैनी और घुटन महसूस होता है। अन्विता के चेहरे पर वही बेचैनी और घुटन एकदम नेचुरल फिल देता है। खासकर उन सीनों में जहाँ लगता है,कि उनकी बेटी उनके सामने ही है और परिणीति का एक्टिंग वहाँ एकदम नेचुरल लगता है ।

साक्षी के किरायेदार में जेनिफर विंगेट का अभिनय भी खूब सधा हुआ महसूस होता है। साक्षी के चेहरे का भाव, आवाज में उतार-चढ़ाव और नजरों में शक का दायरा दर्शको के बिच बनाये रखती हैं। पति का रोल करने वाले ताहिर राज भसीन ने अपने किरायेदार को क्या खूब निभाया है बाकी सभी एक्टर ने अपने-अपने किरायेदार को पूरी शिद्दत से निभाया है। सुमीत व्यास के बदले तेवरों में गजब का अंदाज देखने को मिल सकता है।

निर्देशन :डी सिल्वा के पहले भी आपने शो देखे होंगे। डायल 100 और कुर्बान जैसी फिल्मों में अपने निर्देशन का जलवा दिखा चुके हैं। जैसे इनको सस्पेंस बुनने में महारत हासिल हो। इस सीरीज में हर एक्टर शक के दायरे में है। डी सिल्वा ने इतनी अच्छी तरह से सस्पेंस को दर्शकों के बीच पेश किया है, यह काम सिर्फ़ वही कर सकते हैं।

शक-ट्रस्ट नो वन शुरुआती एपिसोड में थोड़ा सुस्त लगती है, पर धीरे-धीरे एक के बाद एक जब छोटे-छोटे सुराग सामने आते जाते हैं, तो दर्शक उनके बीच की कड़ियाँ खुद-ब-खुद जोड़ते जाते हैं। और इस तरह कब सीरीज खत्म कर लेते हैं दर्शकों को पता भी नहीं चलता।

ओपिनियन : शक-ट्रस्ट नो वन की कहानी को थोड़ा खींचा गया है। कहानी की फ्लो बनाने के लिए कुछ ऐसे एंगल भी जोड़े गए हैं, जैसे टैगो कार्ड , तांत्रिक बाबा और इलीगल सरोगेसी, जिसका असर आगे चलकर फीका पड़ने लगता है। जब क्लाइमेक्स में रहस्य खुलता है तो रहस्य चौंकाने से ज्यादा कहानी की कुछ कमजोर कड़ियाँ सामने आती हैं।