सिनेमाघर में चल रही दायरा फ़िल्म का निर्देशन मेघना गुलजार ने किया है। जो हमेशा से दर्शकों को कुछ अलग दिखाने का कोशिश करती हैं। तलवार ,राजी जैसे हिट फिल्मों के बाद इन्होंने क्राइम – थ्रिलर मूवी लोगों के बीच दायरा फ़िल्म लेकर आई । जिसमें पृथ्वीराज शिवकुमारन और करीना कपूर खान जैसे मजे हुए कलाकार हैं, फिल्म का मुद्दा बेहद संवेदनशील है… ‘एक बलात्कार और पुलिस एनकाउंटर’ पूरी कहानी इन दो पहलुओं पर टिकी हुई है।
मूवी की कहानी : कहानी की शुरुआत में ही घटना हो जाती हैं , फिर से एक फैमिली ने अपनी बेटी खोई है । 24 साल की लड़की के साथ गैंगरेप हुआ हैं , और उसकी हत्या भी हो चुकी हैं । कहानी इसी के इर्द-गिर्द घूमती है, एक बड़े सीनियर पुलिसअफसर रमन ( पृथ्वीराज शिवकुमारन ) और उनकी टीम मिलकर इन्वेस्टिगेट करती हैं , और इस पूरे घटना को अंजाम देते हैं। और कुछ ही दिनों में गैंगरेप किए हुए आरोपियों को ‘ओपन एंड शट केस’ में एनकाउंटर करके , मामला को खत्म कर देती हैं

तो वहीं दूसरी तरफ SIT हेड अजोनी ( करीना कपूर खान ) जो पूरी तरह से कानून के दायरे में रहकर काम करती है । फिल्म कभी अतीत में जाती है, तो कभी वर्तमान में आती है, रमन पर सवाल उठाया जाता हैं ,शुरुआती दौर में रमन के टीम ने किस तरह लापरवाही की। लड़की के परिवार को भड़काया , शायद थोड़ी गंभीरता से लेती तो वह लड़की बच सकती थी।
करीना कपूर खान पुलिस एनकाउंटर पर सवाल पर सवाल खड़े करती हैं। कहानी धीरे-धीरे एक-दूसरे के सवालों से आगे बढ़ती है। जब पुलिस किसी आरोपी को पकड़ लेती है तब उसका काम सिर्फ अपराधी को कानून के हवाले करना है? अगर न्याय प्रक्रिया लंबी चले तो.. पुलिस को अपनी तरफ से फैसला लेने का कोई अधिकार नहीं है ? अगर कानून ही अपराधी का साथ देने लगे तो ? ऐसे कई सवालों के जवाब दे जाती है दायरा मूवी .

अभिनय की बात : पृथ्वीराज शिवकुमारन को पहले भी पुलिस के अभिनय में देखा गया है। वह जिस तरह से अपने अभिनय को निभाते हैं । लोगों को काफी पसंद आता है, दायरा मूवी में उनका किरदार कुछ ज्यादा ही सिंपल है, पृथ्वीराज का अभिनय अच्छा होते हुए भी कही न कही कुछ कमी जरूर महसूस कराती हैं। मेघना गुलजार जी ने पृथ्वीराज शिवकुमारन के क्षमता को पूरी तरह से उपयोग नहीं कर पाई है ।
करीना कपूर खान का भी किरदार एकदम सहज है , उनके किरदार में जो गुस्से, बेचैनी दिखानी चाहिए थी। वो महसूस ही नहीं होती , इस मामले में करीना कही न कही पीछे रह जाती है। बाकी कलाकारों ने भी अच्छी अभिनय की है। जैसे कमलजीत सिंह, सीमा आजमी और अंचित कौर ने भी अच्छा काम किया है ।
निर्देशन ; निर्देशक के तौर पर इस बार मेघना गुलजार थोड़ी कमजोर पड़ गई हैं। उन्होंने तलवार – राजी जैसे मूवी में जो क्राईम -थ्रिलर सस्पेंस का स्वाद जनता को दिया था वह इसमें कहीं नहीं देखने को मिलता हैं । इस मूवी में इनका निर्देशन थोड़ा कमजोर और दिशाहीन लगता है। मुख्य कलाकारों के बीच कोलाहल और बातचीत बहुत सीमित दिखता है। डायरेक्टर खुद ही फैसला नहीं कर पा रहे हैं । कि वह किस पक्ष में है। किसका समर्थन करना चाहती है, कानून का या एनकाउंटर का? ऐसा लगता है जैसे डायरेक्टर खुद कंफ्यूजन में हो और उनके पास जवाब ना हो । दायरा फ़िल्म का जो सब्जेक्ट वो कोई नया नहीं हैं । बल्तकार और एनकाउंटर ऐसे मुद्दे पर हम लोगों ने कई मूवी फिल्में देखी हुई है ।