मोदी सरकार ने भारतीय समाज के जन स्वास्थ्य और गरीबी को समझते हुए वर्ष 2018 में शुरू किया था आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (ABPMJAY)। आज आयुष्मान भारत योजना, भारत के पिछड़े, निर्धन और जरूरतमंद वर्गों के लिए वरदान साबित हो रहा है। आयुष्मान भारत योजना मात्र एक बीमा योजना नहीं है, यह व्यक्ति को गरिमापूर्ण जीवन एवं समान अवसरों से जोड़ने का एक सामाजिक नीति भी है। इस योजना का कई आयाम है।
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना का उद्देश्य
इस योजना का उद्देश्य समाज में रह रहे लोगों, आर्थिक रूप से वंचित वर्गों को स्वास्थ्य बीमा के माध्यम से अच्छा जीवन प्रदान करना है। प्रत्येक वर्गों के लोगों को उत्तम स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच को सुनिश्चित करना भी है। आज इस योजना के आधार स्तर पर पड़ने वाले प्रभावों के साकार रूप को देखा जा सकता है। इससे इस योजना को समझने में मदद मिलेगी।

भारत को गरीबी से बचा रही आयुष्मान योजना।
यह योजना समाज के लोगों में जीवन जीने की सकारात्मक प्रभाव डाल रही है। आयुष्मान भारत योजना उनके जीवन की रक्षा तो कर ही रही है, साथ में उन्हें गरीबी से बाहर भी निकाल रही है, नहीं तो कर्ज के जाल में फँस जाते। आज उन्हें किसी से कर्ज भी नहीं लेने पड़ते हैं और इस योजना के चलते शरीर के गंभीर से गंभीर बीमारियों का निःशुल्क में उपचार किया जा रहा है।
व्यक्ति की सेहत अच्छी होने के कारण कार्य क्षमता में बढ़ोत्तरी देखी गई है, जिससे पारिवारिक लोगों का जीवन और भी सुगम हो गया है। आयुष्मान योजना के सहयोग से लाभार्थी व्यक्ति अपने स्वास्थ्य को ठीक करने के बाद पुनः अपने सामाजिक- आर्थिक जीवन में लौट आता है और एक अच्छा जीवन प्राप्त करता है। इस प्रकार यह योजना स्वास्थ्य सुरक्षा द्वारा मानवों की सामाजिक एवं आर्थिक सहभागिता दोनों में सकारात्मक प्रभाव को प्रभावित कर रही है।
इस योजना का सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह समाज में बिना किसी भेदभाव के हर किसी का उपचार करने में सक्षम और स्वास्थ्य से संबंधी असमानताओं को कम करने का प्रभावी माध्यम बन रही है।
जेब से स्वास्थ्य पर 62.6 प्रतिशत खर्च।
भारत में पहले के अपेक्षा अब गरीबी दर कम होती रही है, लेकिन आज भी 12.4 प्रतिशत व्यक्ति गरीबी रेखा के नीचे ही वास करते हैं। इन गरीबों के स्वास्थ्य पर होने वाले खर्च का बड़ी भूमिका होती है। भारत स्वास्थ्य पर किए जाने वाले कुल खर्च में 62.6 प्रतिशत लोग अपनी जेब से करते हैं। अपनी जेब से किया जाने वाला खर्च में भारत दुनिया में सबसे आगे है।
कर्ज लेने से बचा रही है आयुष्मान भारत योजना।


पहले जब कोई निर्धन व्यक्ति बीमार पड़ता तो वह सुदखोरों से कर्ज लेता था। समाज के वंचित वर्गों के लोग बहुत बड़ी संख्या में कर्ज सुदखोरों से ही लेता था। इलाज के खातिर लिया जाने वाला कर्ज , जिस पर वे चक्रविधि ब्याज लेते थे। गरीब परिवार का कोई सदस्य लंबे समय तक बीमार रह जाता था तो अस्पताल में न रहने पर मजबूर होता था। कोई कमाई न होने के कारण वह परिवार गरीबी के खाई में गिरता ही जाता था। मोदी सरकार ने इन्हीं परिस्थितियों को समझते हुए आयुष्मान भारत योजना का शुरुआत किया।
भारत सरकार ने बनाए 42.31 करोड़ आयुष्मान कार्ड।
आयुष्मान भारत योजना के तहत हर एक गरीब परिवार को साल भर में पांच लाख रुपये का कैशलेस इलाज कराने की सुविधा देता है। अब तक कुल 12.69 करोड़ से अधिक अस्पतालों में भर्ती लोगों का इलाज किया जा चुका है। इन पर किए गए खर्च 1.92 लाख करोड़ है। इस योजना के तहत भारत में अब तक कुल 42.31 करोड़ से अधिक आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। भारत सरकार की इस योजना ने गांव से लेकर शहर तक अपने प्रभावों को दिखाया है। इस योजना ने समाज के एक हिस्से को निर्धनता से मुक्त किया और साथ ही साथ उन्हें एहसास दिलाया सरकार उनकी जरूरतों को समझती है।














