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भोर में यू ही नहीं गाते पक्षी, इसका रहस्य क्या है?

भोर में यू ही नहीं गाते पक्षी, इसका रहस्य क्या है?
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देश दुनिया के अनेको साहित्यकारों ने अपनी अपनी कविताओं में भोर में पक्षी के कलरव का अपने-अपने तरीके से सजीव वर्णन किया है। कहते हैं भोर की नमी और दूर तक आवाज साफ जाने के कारण सुबह पक्षियों की आवाज अधिक मधुर सुनाई देती है। लेकिन ऐसा नहीं है। यह तथ्य पूरी तरह गलत साबित हो गया।

गाते पक्षी को लेकर 2025 में एक अध्ययन हुआ था, जिसमें कॉर्नेल लैब आफ ऑर्निथोलॉजी और भारत के प्रोजेक्ट ध्वनि ने मिलकर साथ में एक अध्ययन किया। उन्होंने जब वर्षावनों की ऑडियो रिकॉर्डिंग को सुना तो पाया कि, पक्षी सुबह इसलिए गाते हैं कि उस वक्त रोशनी कम होती है और शिकार करना मुश्किल होता है इसलिए वे उस खाली समय का उपयोग अपने सीमाओं को तय करने के साथ ही साथ अपने साथी को आकर्षित करने के लिए भी गाना गाते हैं।

गाते पक्षी अपने साथी को कैसे रिझाते हैं?

जिंग पक्षियों की आँखें उनके शरीर के रेशियों से बड़ी होती हैं, जैसे रॉबिन। वे सुबह के थोड़े रोशनी में भी कीट-पतंगों को देख सकते हैं। इसीलिए सुबह उठकर सबसे पहले गाना शुरू कर देते हैं, जिससे वे अपना पेट भर सकें और छोटी आँख वाली पक्षी जैसे कबूतर, गौरैया रोशनी होने पर अपने साथी को रिझाने के लिए सुर छेड़ते हैं। सूरज की रोशनी के साथ-साथ सुबह का उठाया संगीत लहर पूर्व से पश्चिम की ओर आगे बढ़ता चला जाता है।

कितने समय के अंतराल पर एक स्थान से दूसरे स्थान के पक्षी गाते हैं?

ऐसा देखा गया है कि जब भारत के अरुणाचल प्रदेश में पक्षी गाना शुरू करता है तो लगभग दो घंटे बाद गुजरात के पक्षी भी सुर से सुर मिलाकर गा रहे होते हैं।
कई शोधकर्ताओं ने भारत के पश्चिमी घाट पर डिवाइस लगाकर लगभग 70 पक्षी प्रजातियों की आवाजों का विश्लेषण किया।

इस शोध में पाया गया कि एशियाई कोयल सबसे अलग है सारे पक्षियों में से यह कोयल एक ऐसा पक्षी है जो सुबह सूर्य के उगने से बहुत पहले से गाना शुरू कर देती है , इस बात का जिक्र हैविटेट इकोलॉजी ऑफ एशियन कोयल रिपोर्ट में किया गया है रिपोर्ट में यह भी जिक्र किया गया जैसे शहरों में कौओं की आबादी ज्यादा होने के कारण कोयल ने भी इंसानी बस्ती और शहरी पेड़ों के आसपास रहने लगी और अपने गायन को बहुत तेजी से ढाल लिया।

रिकॉर्ड की गई 518 गाते पक्षियों की आवाजें।

सुबह के गाते पक्षी का आवाज रिकॉर्ड करने के लिए पैसिव एकॉस्टिक मॉनिटरिंग तकनीकी का इस्तेमाल किया गया था, जिससे शोधकर्ताओं ने भारत में पहली बार ओपन एक्सेस क्लाउड सोर्स्ड ध्वनि लाइब्रेरी तैयार किया, जिसमें 25 राज्यों और कुछ केंद्र शासित प्रदेशों से 518 प्रजातियों की आवाजें रिकॉर्ड की गई हैं, जिसमें कुल 5,815 मिनट की आवाज रिकॉर्ड है।

suvas singh

Has an interest in Hindi journalism and current affairs. Focuses on presenting news related to national and global events, politics, education, and social issues in simple, clear Hindi.

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