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Vijayadashami : पर ले संकल्प। बदले अपने जीवन के शैली को , संकल्प ही उत्साह है।

Vijayadashami : पर ले संकल्प। बदले अपने जीवन के शैली को , संकल्प ही उत्साह है।
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Vijayadashami का त्योहार घर के हर एक सदस्य में उत्साह भर देता है, क्योंकि वे जानते हैं इस दिन धर्म ने अधर्म पर विजय पाया था। तो यही सोचकर कुछ लोग विजयदशमी के दिन संकल्प लेते हैं और अपने जीवन में कुछ नया करने की कोशिश में लग जाते हैं।

विजयदशमी केवल असत्य का प्रतीक ही नहीं, बल्कि ऐसा एक समय है जब कोई काम करना होता है, तो कैलेंडर खोलने की जरूरत नहीं पड़ती, हम करना शुरू कर देते हैं।
चलो इस विजयदशमी पर करते हैं संकल्प। जब तक सफल ना हो, सुख चैन को त्यागो तुम। आओ मिलकर करें कुछ व्यावहारिक संकल्प। संकल्प ऐसा जिसे हम पूरा कर सकें।

Dussehra से ले संकल्प और करें ये काम।

जारी रखें सीखना : हमेशा आप कुछ न कुछ सीखते रहिए क्योंकि यही एक ऐसा वस्तु है जिसको आपसे इसे कोई अलग नहीं कर सकता। आप जो सीख रहे हो, उस हुनर को किसी दूसरे व्यक्ति से साझा जरूर करें। इससे आपके सीखने के प्रति उत्सुकता बढ़ती जाएगी और आप आगे सीखते जाएंगे।

vijayadasmi ka photo
photo source : open AI

डायरी लिखना करें शुरू। आपके मन में जो कुछ भी चल रहा हो उसे आप एक डायरी में नोट करें और उस पर गौर करें। अपने निजी जिंदगी को सोशल मीडिया जैसे फालतू प्लेटफॉर्म को न दें और न ही कोई फालतू का पोस्ट करें क्योंकि आपका पोस्ट आपकी मानसिक स्थिति को दर्शाता है। शांत होकर डायरी लिखें और उस पर गौर करें और अपने गलतिओं को सुधारें।

तुलना करना करें बंद। आजकल के युवा भी इसी में ज़्यादा परेशान है। वो अपनी तुलना हर किसी से करता फिर रहा है किसी दूसरे व्यक्ति या इन्फ्लुएंसर के रील से और रियल लाइफ से काफ़ी अंतर होता है। अपनी वास्तविक जिंदगी का तुलना ऐसे व्यक्ति से करना बंद करें क्योंकि आप भी जानते हैं जो दिखता है वो होता नहीं है। आप अपने सकारात्मक भाव पर ध्यान दो और नकारात्मक भाव से दुरी बनाये रखने के लिए ले संकल्प। क्योंकि संकल्प और उत्साह दोनों ही एक दूसरे के पूरक हैं। रामायण में महर्षि वाल्मीकि ने कहा है

संकल्प और उत्साह सबसे बड़ा बल है, उत्साह से बढ़कर दुनिया में कोई शक्ति नहीं होती। जिस मनुष्य के पास दृढ़ संकल्प और उत्साह है, उस मनुष्य के लिए इस संसार में कुछ भी असंभव नहीं होता।

नकारात्मक सोच से बनाए दूरी। दशहरा हम मनाते हैं क्योंकि राम ने नकारात्मक सोच रखने वालों पर विजय पा लिया था लेकिन दस सिर वाला रावण अपने नकारात्मक सोच पर विजय नहीं पा पाया था और उसका सर्वनाश हो गया। कहीं आप भी नकारात्मक सोच से तो नहीं भरे पड़े हैं? अगर ऐसा है तो इस विजयदशमी पर एक प्रण लें, नकारात्मक लोगों और नकारात्मक आने वाले विचार दोनों को ही नहीं रखेंगे। आप रामायण, महाभारत एवं पौराणिक कथा सुनना शुरू कर सकते हैं, सोशल मीडिया से बनाए रखें दूरी, ये सब से आपको सकारात्मक रहने की प्रेरणा मिलेगा।

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image source : AI

बिना दिखावे का करें कुछ नेक कार्य। आप कम से कम एक महीने में एक अच्छा या यूँ कहें कि नेकी वाला कार्य जरूर करें। जैसे किसी भूखे को खाना खिलाना, किसी जरूरतमंद की कुछ पैसे देकर मदद कर देना। इससे आपके अंतर मन को जो शांति मिलेगी, इसे सिर्फ आप ही महसूस कर सकते हैं। कहीं आप दूसरों की तरह वीडियो बनाया लगे, हेलो गाइज, आप सभी को विजयदशमी की हार्दिक शुभकामनाएं। आज मैंने भैया को दिया साइकिल। आपको बिना दिखावे वाली मदद करनी है। विडिओ या फोटो नहीं बनानी हैं।

Vijayadashami त्यौहार पर अपनाये ये आदत

सुनने की आदत डालें। विजयदशमी त्योहार ही सुनने का त्योहार है, क्योंकि हम बचपन से सुनते आ रहे हैं कि दशहरा के दिन रावण पर विजय पाई थी राम ने, सोचा है कभी आपने? राम जी कम बोलते थे, वे अंतर्मुखी थे और रावण बहिर्मुखी था, अर्थात ज़्यादा बोलता था। ज़्यादा बोलने वालों का परिणाम क्या होता है, आपको पता है? जब कभी कोई दोस्त या रिश्तेदार अपनी मानसिक परेशानी आपके साथ साझा करे तो, सलाह देने के बजाय उन्हें सहानुभूति के साथ सुनें और आप उन्हें एहसास कराएँ कि आपने उन्हें समझा। बेवजह बोलना बंद करें

ना कहना भी सीखे। जिसने ना कहने की कला सीख ली, वो व्यक्ति खुश रहने की कला सीख ली। यहाँ हर किसी को खुश करने की कोई प्रतियोगिता नहीं चल रही है कि आपको ना कहने में कोई संकोच है। अपनी प्राथमिकताओं को पहचान दो और विनम्रता से ना कहना शुरू करें। कहीं ना कहने के चक्कर में अपने मम्मी पापा को Happy Dussehra करना ही न भूल जाएं।

suvas singh

Has an interest in Hindi journalism and current affairs. Focuses on presenting news related to national and global events, politics, education, and social issues in simple, clear Hindi.

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