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नशे में डूब रहा पंजाब, परविंदर सिंह की हत्या से लोगों में नाराजगी।

नशे में डूब रहा पंजाब, परविंदर सिंह की हत्या से लोगों में नाराजगी।
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पंजाब में नशा का स्तर इतना बढ़ चुका है, कि यहां के युवा से लेकर अधेड़ उम्र के लोग भी नशे के आदी हो चुके हैं। नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या भी कर दी गई। नशे के सौदागरों की इतनी हिम्मत हो चुकी है कि वे विरोध करने वाले व्यक्ति को ही रास्ते से हटा दे रहे हैं। नशे के खिलाफ लड़ाई अब सिर्फ पंजाब को नहीं पूरे देश को लड़ना पड़ेगा।

पंजाब में परविंदर सिंह की हत्या के बाद जनता में नाराजगी बढ़ती जा रही है, जिस कारण से 15 अक्टूबर को ‘पंजाब बंद’ का आह्वान किया गया। आज पंजाब की तीसरी पीढ़ी (अंतर्राष्ट्रीय मान्यताओं के हिसाब से एक पीढ़ी 15 साल की होती है) नशे में डूब गई है। इसी कारणों से नौजवानों को लगता है कि उनका भविष्य खत्म हो चुका है। क्योंकि उनके पास करने को काम नहीं। पंजाबियों में संपन्नता का जबरदस्त भाव होता है, इनको विदेश जाने की आशा होती है, लेकिन जब यही आशा निराशा का रूप ले लेती है। तब वे इसका समाधान भी नशे में ही ढूंढते हैं।

पंजाब में कई तरह के नशीले पदार्थ मिलते हैं, लाहन से तैयार देसी शराब, अफीम, बुक्की, हेरोइन, (जिसे पंजाब में चिट्टा के नाम से जाना जाता है) और सिंथेटिक ड्रग्स का भी इस्तेमाल पंजाब में खूब होता है। इसके अलावा डिजाइनर ड्रग्स के लती भी काफी हैं।

पंजाब नशे में डूबा कैसे?

पंजाब नशे में इतना डूबा कैसे? इसका जवाब हमें 1980 के दशक से मिलेगा जब अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में सोने की कीमते स्थिर होने लगी, पाकिस्तान से सटे होने के कारण पंजाब में सोने की तस्करी खूब होती थी। अमृतसर, फिरोजपुर, गुरुदासपुर जैसे सीमावर्ती इलाके से तस्कर भारत में इंटर होते थे। लेकिन जब 1980 के दशक में सोने का दाम स्थिर हुआ तो तस्कर इसका विकल्प तलाशना शुरू किया।

भारत के पड़ोसी देशों में दो जगह अफीम की खेती बहुत ज्यादा होती है, पहला गोल्डन ट्रायंगल यानी म्यांमार और थाईलैंड के क्षेत्रों में और दूसरा गोल्डन क्रीसेट यानी अफगानिस्तान और ईरान के क्षेत्रों में। पाकिस्तान से सटे होने के कारण गोल्डन क्रीसेट से यह मादक पदार्थ आईएसआई के पाले हुए चमचे इसे पहुँचाने लगे।

Border Smuggling Bust at Dusk

अफीम एक प्राकृतिक पदार्थ है जिसका रासायनिक रूप मॉर्फीन है और मॉर्फीन का रासायनिक रूप ब्राउन शुगर और चिट्टा भी पंजाब पहुँचने लगी ।
इस नशीले पदार्थों का तस्करी भी वही लोग करते थे जो पहले सोने की किया करते थे। 1980 के दशक के आसपास पंजाब में नशे का चलन अत्यधिक हो चुका था। उस समय पंजाब नशे का केंद्र बन चुका था। इस मौके का फायदा आतंकवादी तक उठाने लगे उन्होंने कुछ तय की गई मात्रा हमें चिट्टा खरीदने पर नौजवानों को हथियार मुफ्त में देना शुरू किया। मुश्किल तब बढ़ी जब उस समय के तत्कालीन सरकारें भी इस पर ध्यान नहीं दिया। आज भले ही गुजरात एवं दक्षिणी तटों से ड्रग्स पंजाब पहुँचता है।

आज पंजाब में ऐसा हाल है कि नशा हर दिन किसी न किसी की जान ले रही है। नशे के ठेकेदार भी बहुत ढीठ हो गए हैं। नशे के विरोध जो कोई कर रहा है उसे मौत के घाट उतार दे रहे हैं। अभी परविंदर सिंह की हत्या कर दी गई, तो वही ड्रग्स इंस्पेक्टर नेहा सौरी के हत्या को कैसे भुलाया जा सकता है। पिछले महीने गुलजार सिंह ने खुदकुशी कर ली थी उनका गलती सिर्फ इतना था कि वह किसी मंत्री से नशा बिकने को लेकर सवाल कर लिया था। बाद में उन्हें इतना सताया गया कि वह खुदकुशी करने पर मजबूर हो गए।

पंजाब के मोगा में महिलाओं ने नशे के खिलाफ मुहिम भी खोल रखा था गांवों में रात भर पहरा भी देती थीं ताकि तस्कर गांवों में आवाजाही न कर सके साथ में नौजवानों को जागरूक करने का कोशिश भी कर रही हैं।

drugs addicated person

साल 2024 में भारत से 3.69 लाख किलोग्राम अफीम से बना ड्रग्स, 5.37 लाख किलो कैनाबीस (भांग) आधारित ड्रग्स तो 1.31 लाख किलो कोकेन आदि को जब्त किए गए थे।
साल 2023 में यह आकड़ा 4.08 लाख किलो , 5.46 लाख किलो और 112 किलो मादक पदार्थ को जब्त किया गया था।

ऐसा नहीं है कि इसे रोका नहीं जा सकता, इसे रोका जा सकता है। बरसते कुछ कठिन कदम उठाने होंगे। सबसे पहले तस्करी में इस्तेमाल होने वाले रास्ते को बंद करना होगा, नौजवानों को जागरूक करना होगा, यूथ क्लब खोलने पड़ेंगे, रोजगार पैदा करने होंगे और स्वास्थ्य विभाग के भ्रष्टाचार को भी रोकना होगा क्योंकि ड्रग माफिया की एक बड़ी तस्करी सरकारी गोदामों से भी होता है। इस लोगों की सोच को बदलने की जरूरत है, तब जाकर कहीं मादक पदार्थों की तस्करी पर रोक लगाया जा सकता है।

suvas singh

Has an interest in Hindi journalism and current affairs. Focuses on presenting news related to national and global events, politics, education, and social issues in simple, clear Hindi.

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