महाराष्ट्र के खाद्य व औषधि प्रशासन /Food and Drug Administration (FDA) तुकाराम मुंडे भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं कर पाते हैं। अपने ही विभाग में सफाई अभियान चला दिया। मालेगांव से 252 टन घटिया क्वालिटी की सुपारी जब्त की गई थी, जिसे नष्ट करने का आदेश था, लेकिन नष्ट करने के नाम पर फर्जी पंचनामा तैयार किया गया। जब इस मामले का पता मुंडे को चलता हैं, तब अपने ही विभाग के पांच अधिकारियों को तुकाराम मुंडे निलंबित कर देते हैं।
यह सुपारी घोटाला फरवरी 2024 में सामने आया था, जब एफडीए के अधिकारियों ने नासिक जिले के मालेगांव में 252 टन घटिया क्वालिटी की सुपारी को जब्त की थी। इस घटिया क्वालिटी की सुपारी की कीमत 10 करोड़ आका जा रहा है, जो कुल 3605 भरी बोरियों से बरामद की गई थी, जो खाने योग्य नहीं थी।
5 मार्च 2025 को अदालत इस घटिया सुपारी को नष्ट करने का आदेश दिया था। इस सुपारी को नष्ट करने के बजाय अधिकारियों ने फर्जी पंचनामा तैयार किया और न खाने योग्य घटिया सुपारी को वापस बाजार में बेच दिया।
252 टन सुपारी घोटाला
मालेगांव के एक युवक सचिन खैरनार ने तुकाराम मुंडे को इस मामले में शिकायत की। तब मुंडे जी ने फाइल को मंगवाकर सारे दस्तावेजों की जांच की रिकॉर्ड के अनुसार एक ट्रक में करीब 4 टन सुपारी ले जाने की क्षमता मानी जाए तो 11 ट्रकों में एक बार में केवल 44 टन ही सुपारी ले जाई जा सकती है। ऐसे में आठ घंटे में 252 टन सुपारी नष्ट किए जाने पर संदेह हुआ। तो इस मामले को जांच करने के लिए एक समिति गठन हुई और समितियों ने भी इसमें गंभीर विसंगतिया पाई।
जिसे तुकाराम मुंडे ने अपने पांच अधिकारियों अविनाश दाभाड़े, अमीत रासकर, गोपाल कासार, सुवर्णा महाजन और योगेश देशमुख के निलंबन की फाइल पर हस्तांतर किए और इन सब को हमेशा के लिए निलंवित कर दिया।












