नेता जी सुभाष चंद्र बोस की जीवनी।
नेता जी सुभाष चंद्र बोस का जन्म एक भारतीय परिवार में हुआ। नेता जी बचपन से ही प्रतिभा के धनी व्यक्ति थे। नेता जी बचपन से ही पढाई में अच्छे थे, और वो बाल्यकाल से ही प्रवृत्तियों की चिंतनधारा थे, पीड़ित मानव तथा राष्ट्र के प्रति सम्मान और संवेदनाशील थे।
Netaji Subhash Chandra Bose का जन्म- 23 जनवरी 1897, ओडिशा के कटक जिला में हुआ था।नेता जी के पिता का नाम जानकीनाथ था और उनके माता का नाम प्रभावती देवी था, अपनी शिक्षा कोलकाता विश्व विद्यालय से बी.ए दर्शनशास्त्र में 1919 में पास किया था। आगे की पढाई विदेश जाकर कैम्ब्रिज विश्व विद्यालय से मानसिक और नैतिक विज्ञान से बी ए किया. आगे चलकर आजाद हिंद फौज के नेता भी बने तथा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष भी बने। ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक के संस्थापक और अध्यक्ष भी थे, नेता जी सुभाष चंद्र बोस का जीवन सरल नहीं था ये बचपन से ही निडर और स्वाभिमानी स्वभाव के व्यक्तित्व क थk
भारत जैसा देश ने इस देव पुत्र को 18 अगस्त 1945 (उम्र लगभाग 48) एक विमान दुर्घत्ना, सेना अस्पताल नानमोन शाखा ताइहोकु ताइवान में हो गया।
Netaji Subhash Chandra Bose आई. सी. एस. की परीक्षा में सफलता।
नेता जी अपने पिता की आज्ञा से इंडियन सिविल सर्विस ( आई. सी. एस.) की परीक्षा लेने लन्दन चले गए। अपनी प्रखर बुद्धि से उन्होंने योग्यता सूचि में चौथी स्थान प्राप्त किये। सुभाष सन 1921 में भारत लौट आए। इस समय यहाँ सरकारी नौकरी का बायकाट चल रहा था. जो कोई भी लन्दन से आई. सी. एस की परीक्षा में पास होता तो उसे भारत में सरकारी पद का लाभ मिलता ये पद नेता जी सुभाष चंद्र बोस को भी मिला था। उस समय जलियावाला बाग का हत्याकांड हो चूका था। लोग अंग्रेजों के राज्य से घृणा करते थे। रविन्द्र नाथ और जमानालाल बजाज जी ने राय बहादुर की खिताब को छोड़ चुके थे। सभी गांधी जी के झण्डे के निचे एकत्र हो रहे थे अतः नेता जी ने सरकारी नौकरी छोड़ कर कांग्रेस की सदस्यता ली और अफसर से सिपाही हो गए।
नेता जी सुभाष चंद्र बोस की प्रथम जेल यात्रा।
नेता जी सुभाष चंद्र बोस कई बार जेल गए लेकिन पहली बार जेल , जब देशबन्धु ने उन्हे राष्ट्रीय स्वयं सेवक टोली का सेनापति बनाया तो उनकी संगठन क्षमता देख ब्रिटिश सरकार घबरा गई। ब्रिटिश सरकार इस संगठन को गैर कानूनी कहा और इस टोली के कई युवकों को जेल में डाल दिया गया। नेता जी सुभाष चंद्र बोस को भी बंदी बना कर अलीपुर जेल में भेज दिया गया। वे पहली बार छः माह जेल में थे. यह सुभाष की प्रथम जेल यात्रा थी।
नायक Netaji Subhash Chandra Bose ; आजाद हिन्द फ़ौज
नायक नेता जी सुभाष चंद्र बोस एक दिन 26 जनवरी 1941 को पठान वेष धारण करके घर से सबकी आँखों में धुल छोक कर, निकल काबुल जा पहुंचे।
इस समय इनका नाम जियाउद्दीन था एक दिन सुभाष जी का रहस्य खुलते खुलते रह गया। वे काबुल में उत्तमचंद नामक व्यक्ति के घर ठहरे थे, फिर वहा से जर्मन दूतावास की सहायता से बर्लिन जा पहुंचे। बर्लिन में उनका खूब स्वागत हुआ।
नायक नेता जी सुभाष चंद्र बोस युद्ध विद्या की ट्रेनिंग ली और फिल्ड मार्शल हो गए। उन्होने धुरी राष्ट्रों की सैनिक शक्तियों की सहायता से भारत की आजादी के लिए प्रयत्न शुरू कर दिया। उन्होंने वहां भारतीयों को संगठित करके आजाद हिन्द फौज बनाई। इस समय आजाद हिन्द फ़ौज कि संख्या 22 हजार थी।
2 जुलाई 1943 को इस आर्मी की कमान सार्वजनिक रूप से रासबिहारी बोस ने नायक नेता जी सुभाष चंद्र बोस को सैंपी थी।इस आर्मी में एक रेजिमेंट रानी झांसी भी थी जिसमे केवल महिलाये थी लगभग एक हजार महिलाये थी।

Netaji Subhash Chandra Bose के विचार व कथन
1. स्वतंत्रता की यज्ञ रक्त की समिधा से होती हैं, भिक्षा और सत्याग्रह से नहीं।
2.इस संसार में कोई भी विचार बिना त्याग और बलिदान की अग्नि में तपे हुये नहीं पनपा हैं।
नेता जी सुभाष चंद्र बोस के नारे।
तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा।
जय हिन्द ( जो उस समय भारत की राष्ट्रीय नारा बन गयी थी )
नेता जी सुभाष चंद्र बोस पर दो शब्द
नेता जी सुभाष चंद्र बोस कटक के धरती पुत्र है उनके त्याग और बलिदान का भारत भूमि सदैव गर्व करेंगी नेता जी देश के इतिहास में अतुल्नीय योगदान रहा हैं। नेता जी सुभाष चंद्र बोस जी का जो भारत देश को आजाद करने का सपना था वो उनके जीवनकाल में संभव न हो सका लेकिन जो नेता जी का विजन था वो पूरा हो क्योकि उनका विचार भारत देश को आजाद ही नहीं करना था , वो देश को स्वाधिर व गौरवशाली देश बनाना भी चाहते थे।
Netaji Subhash Chandra Bose से कुछ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
सुभाष चंद्र बोस को नेता जी की क्यों कहलाते हैं ?
जब सुभाष जी बर्लिन में पहुंचे तब उनका खूब स्वागत हुआ , जर्मनी के हिटलर ने भी इस स्वागत में भाग लिया और जर्मन सरकार के परराष्ट्र विभाग ने इनको ” फ़्यूहरर ऑफ़ इंडिया ” अर्थात भारतीय सेना की पदवी से विभूषित किया। तभी से वे नेता जी कहलाने लगे।















