2017 के बाद भारी घाटे में चल रहे IDBI Bank को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी ने, घाटे में चल रहे IDBI Bank को बिकने की मंजूरी दे दी। यह सौदा 52,878 करोड़ रुपये में हुआ। इसको कनाडा की कंपनी Canada Inc ने खरीदा। इस बैंक में भारत सरकार की भारी हिस्सेदारी रही लगभग 30.48 प्रतिशत तो वहीं LIC की भारी हिस्सेदारी रही लगभग 30.24 प्रतिशत। इन दोनों ने भी अपनी हिस्सेदारी को कनाडा इंक को अपना हिस्सा बेचा। इतना हिस्सा बिक्री के बाद भी IDBI बैंक में भारत सरकार का 15 प्रतिशत व LIC का 19 प्रतिशत हिस्सेदारी बची है।
IDBI Bank के खाताधारकों का क्या?
कनाडा इंक फेयरफैक्स फाइनेंशियल होल्डिंग लिमिटेड की सब्सिडियरी कंपनी है। Canada Inc अब RBI के बिक्री शर्तों के मुताबिक काम करेगी। जो कर्मचारी IDBI बैंक में काम कर रहे हैं, जिसमें कुल 19,000 से अधिक कर्मचारियों की नौकरी है, इन पर कोई भी दिक्कत नहीं आएगी। वो जैसे पहले बैंक में काम कर रहे थे, वैसे ही काम करेंगे। IDBI Bank की हिस्सेदारी बेचते समय इस बात का पूरा ध्यान रखा गया है, शर्तों के मुताबिक तीन साल तक IDBI Bank में कनाडा इंक कोई फेरबदल नहीं कर सकती।
वित्त मंत्रालय ने कहा, जमाकर्ताओं का पांच लाख तक की रकम बिल्कुल सुरक्षित है चाहे वो अन्य खाताधारक हो या प्रधानमंत्री जन धन योजना, जीवन ज्योति बीमा या अटल पेंशन योजना जैसी स्कीम के साथ और कई प्रकार की बैंकिंग सेवाएँ, वो पहले की तरह ही जारी रहेंगी।
2019 में LIC ने इसमें बड़ी हिस्सेदारी खरीदी थी।
भारत को औद्योगिक के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के उद्देश्य से स्थापित IDBI Bank . रीस्ट्रक्चर 2013 में किया गया था। लगातार घाटे में जा रहे इस बैंक में 2019 में एलआईसी ने इसमें बड़े लेवल की हिस्सेदारी खरीदी थी। लेकिन लगातार घाटे में जा रही इस बैंक से सरकार एवं LIC का हिस्सेदारी बेचने की प्रक्रिया 2021 से ही शुरू हो चुकी थी।
शुरुआत में IDBI बैंक के हिस्सेदारी को खरीदने के लिए पांच कंपनियाँ आई थीं लेकिन अंत में दो ही बची, जिसमें फाइनल खरीद Canada Inc के साथ ही हुई। एलआईसी एवं भारत सरकार की ज्यादातर हिस्सेदारी कनाडा इंक ने ही खरीदी है। कनाडा इंक खरीददारी के शर्तों के मुताबिक दो वर्षों में सरकार एवं एलआईसी की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत तक ले जाएगी।
IDBI बैंक का सफर कुछ इस तरह रहा।
IDBI Bank की स्थापना 1 जुलाई 1964 को हुई थी। शुरुआत में ये RBI की सहायक कंपनी के तौर पर काम कर रही थी इस बैंक की स्थापना IDBI अधिनियम, 1964 के तहत हुई थी , जो आगे चलकर RBI से अलग करके IDBI वित्तीय बैंक बना दिया गया है, जिसका पूरा स्वामित्व भारत सरकार को हस्तांतरित कर दिया गया। भारत में जितने भी बड़े वित्तीय संस्था हैं, वो मूल रूप से IDBI बैंक के ही छत्रछाया में शुरू किए गए थे, जो बाद में भारत सरकार ने जरूरतों को ध्यान में रखते हुए इसे पूर्व बैंक के रूप में बदल दिया और 1 अक्टूबर 2004 को यह एक बैंकिंग कंपनी बन गया। जिसे इसे RBI ने एक अनुसूचित बैंक (शेड्यूल बैंक) के रूप में अधिसूचित किया।
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