इस बढ़ती महंगाई के दौर में यदि आपको अपनी वृद्धावस्था की आर्थिक सुरक्षा को पक्की करनी है। तो समय के रहते आपको बकेट स्ट्रेटजी और एसेट एलोकेशन के नियमों को समझना होगा।
आज रिटायरमेंट का मतलब सिर्फ काम बंद करना ही नहीं रह गया। बल्कि आप एक ऐसे मंजिल की तरफ बढ़ रहे हैं, जहाँ वित्तीय अनुशासन का होना जरूरी है। जीवन भर कमाई के सिलसिले में भागदौड़ के बाद जब इंसान रिटायरमेंट की दहलीज पर पहुँचता है। तो उसके सामने एक बड़ा सवाल खड़ा होता है, क्या उसके जीवन भर की जमा पूंजी उसके बुढ़ापे में साथ दे पाएगी? क्या वह अपने परिवारों को सुरक्षित रख पाएगा?
PGMI इंडिया रिटायरमेंट रिसर्च 2025 के अनुसार 37 प्रतिशत भारत में रह, रहे लोगों के पास रिटायरमेंट का प्लान ही नहीं है। मतलब आधे से भी कम लोगों को यह जानकारी है कि उनके रिटायरमेंट के समय उनके पास कितना पैसा होना जरूरी है। आखिर ऐसे में एक बड़ा सवाल खड़ा होता है कि रिटायरमेंट के समय उसके पास कितना पैसा होना चाहिए?
आपका रिटायरमेंट आपके वार्षिक खर्च का 30 से 35 गुना के बराबर होना एक अच्छा बेंचमार्क माना जाता है। भारतीय अर्थशास्त्र की माने तो 2.5 से 3 फीसदी की वार्षिक दर के निकासी को सबसे सुरक्षित माना जाता है। यदि आपका रिटायरमेंट 45 से 60 वर्ष के बीच में हो रहा है। तो आपका 3 फीसदी का निकासी आपके रिटायरमेंट फंड के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।
एसेट एलोकेशन को समझें :
जब आप अपनी 60 वर्ष की आयु सीमा पार कर लेते हैं। तो आपको अपने पूरी पूँजी को किसी फिक्स डिपॉजिट या डेट में डाल देना कोई समझदारी नहीं होती क्योंकि जैसे-जैसे महंगाई बढ़ती जाएगी। वह आपके पैसे की असली ताकत को निकल जाएगी ।
आप अपने पोर्टफोलियो की 60 से 70 फीसदी पैसे को ऐसे चीजों में डालें जिससे आपको आय का जरिया बना रहे। जैसे आरबीआई फ्लोटिंग रेट बॉन्ड, सीनियर सिटीजन सेविंग स्कीम या डेट म्यूचुअल फंड आदि । और बचे हुए पैसे को इक्विटी या सोने के रूप में रखें ताकि आपके पैसे की ग्रोथ महंगाई के साथ बढ़ती रहे। सीनियर सिटिजन कैश फ्लो को बनाए रखने के लिए इक्विटी फंड के जगह SWP का विकल्प भी ले सकते हैं।

बकेट स्ट्रेटजी को अपनाएँ :
आपका पैसा लंबे समय तक चले इसके लिए आप बकेट स्ट्रेटजी को अपना सकते हैं। पैसे को बाँटकर जमा करने से न केवल खतरा कम होता है बल्कि आपको भविष्य में होने वाले फाइनेंशियल प्रॉब्लम से भी बचाता है।
पहला बकेट आप बनाएँ जो तत्काल खर्च के लिए हो जो रिटायरमेंट के शुरुआती तीन से पांच वर्ष के लिए ही हो इस पैसे को शॉर्ट टर्म डेट या कंजर्वेटिव हाइब्रिड फंड में डालें इस पैसे को आप अपने मासिक खर्चों को पूरा करने में उपयोग करें।

दूसरा बकेट बनाएँ जो मध्यम अवधि के लिए हो इसकी समय सीमा आठ से पंद्रह वर्ष तक रखें इस पैसे को मध्यम अवधि के डेट और इक्विटी में निवेश करें इस पैसे को आप मध्यम अवधि की जरूरतों को पूरा करने एवं महंगाई के साथ तालमेल बिठाते हुए पैसे को बढ़ाने का उद्देश्य रखें ।
तीसरा बकेट बनाएँ लंबे समय के विकास के लिए इसकी समय सीमा रिटायरमेंट के पंद्रह साल बाद से निकासी तक रखें, इस पैसे को आप निवेश करें इक्विटी जैसे उच्च विकास क्षमता वाली संपत्तियों में इस पैसे को आप शेयर बाजार के रिटर्न दम पर फंड को महंगाई से ज्यादा तेजी से बढ़ाने का उद्देश्य रखें।
अगर आप इस तरह प्लानिंग करते हैं तो आपका दो करोड़ का फंड चल सकता है 57 साल। मान लीजिए आप 60 वर्ष की आयु में रिटायरमेंट लेते हैं, आपका मासिक खर्च एक लाख रुपये है और दो करोड़ रुपये के कुल रिटायरमेंट कॉर्पस के साथ आप रिटायर होते हैं। वही अगर आप इस दो करोड़ रुपये को तीन बकेट में बाँटते हैं।
कंजर्वेटिव हाइब्रिड में 25 परसेंट हिस्सा इक्विटी में और 75 परसेंट हिस्सा डेट में तो आपको रिटर्न देगा 8.7 परसेंट का और दूसरा एग्रेसिव हाइब्रिड में 75 परसेंट इक्विटी में और 25 डेट में, जो आपको रिटर्न देगा 11.5 परसेंट का और इक्विटी 12.9 परसेंट रिटर्न, जो शेयर बाजार या इंडेक्स फंड में डालें, जब महंगाई 6 परसेंट मानकर चरणबद्ध तरीके से पैसे की निकासी की जाती है। तो इसके मूलधन और इस पर मिलने वाले रिटर्न के तालमेल से यह दो करोड़ का फंड बिना खत्म हुए 57 साल तक चल सकता है।

















