भारतीय जनता पार्टी “एकात्म मानववाद” के विचारधारा की पार्टी है। एकात्म मानववाद के विचारधारा की देन पंडित दीन दयाल उपाध्याय की है। और वे जनसंघ के महामंत्री भी थे। जनसंघ का गठन दिल्ली में 21 अक्टूबर 1951 को हुई थी। पंडित दीन दयाल 1952 से 1967 तक इस पार्टी के महामंत्री थे।
यह पार्टी एकात्म मानववाद के विचारधारा वाली पार्टी थी, जिस पर आज बीजेपी अग्रसर है। स्वतंत्रता आंदोलन के समय कांग्रेस, कम्युनिस्ट और सोशलिस्ट पार्टी विचारधारा वाली पार्टी कही जाती थी, पर इनके विचारधारा की जन्मभूमि भारत नहीं थी। यह पार्टियाँ मानव को लेकर अलग-अलग की अपनी विचारधारा रखती थीं। कोई हैव या हैव नॉट तो कोई नॉन-बिलीवर या बिलीवर, ऐसे बहुत सारे विचार में बँटे हुए , की बात कर रखती थीं। लेकिन जनसंघ पार्टी की गठन भावनात्मकता के विभाजन की जगह सनातन विचार के विचार “सर्वे भवन्ति सुखिनः सर्वे भवन्तु वीरामय ” और एकात्म मानवता पर हुई।
जनसंघ पार्टी 1952 में लोकसभा चुनाव में भाग लेती है। 1952 में लोकसभा की कुल सीटों की संख्या 489 थी। जनसंघ पार्टी 94 सीटों पर चुनाव लड़ती है, जिसमें से उसे बंगाल में 2 सीट और राजस्थान में 1 सीट मिलती है। 15 राज्यों पर लड़ी जनसंघ पार्टी को कुल तीन प्रतिशत मत ही मिले। कम्युनिस्ट दूसरे स्थान पर तथा सोशलिस्ट तीसरे स्थान पर थी। मत प्रतिशत के हिसाब से जनसंघ पार्टी पांचवें स्थान पर थी।

जनसंघ भारतीय भूमि पर विकसित हुई भारतीय विचारधारा वाली पार्टी बनी, जो व्यक्ति से बड़ा दल और दल से बड़ा देश की बात करती थी। 1964 में ग्वालियर में एक समिति बनी, जिसमें पंडित दीनदयाल उपाध्याय, अटल बिहारी वाजपेयी, दंतोपंत डेंगरी, बलराज मधोक और सुंदर सिंह भंडारी ने भाग लिया थे। इस अनुमोदित प्रारूप को 1965 में विजयवाड़ा अधिवेशन ने स्वीकार किया।
इसमें बातें कही गई थीं : देश अपने स्वभाविक स्वरूप को जानकर ही अपना निर्माण कर पाएगी। भारत की संस्कृति एकात्मवादी है। हम लोगों को इस देश की भूमि के प्रति मातृभाव रखकर चलने वाला समाज का निर्माण करना होगा। इस देश के सभी पंथों और उपासनाओं के प्रति आदर का भाव डेवलप करना होगा।
अर्थ का अभाव, धन का हानि और अर्थ का घमंड ठीक नहीं। पूंजी के लिए बचत करनी होगी। मजदूरों को समान काम के समान मजदूरी मिले, जिस व्यक्ति को काम का अभाव है उसे जीवनयापन के लिए बेरोजगारी भत्ता मिले, निःशुल्क चिकित्सा की व्यवस्था हो, सभी के पास अपना मकान हो, जीवन की आवश्यक वस्तुएँ कर-मुक्त हों और कोई भी भूखा न मरे। प्रारंभिक शिक्षा फ्री हो, स्वास्थ्य के लिए आयुष्मान योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना चले।
भारत के भूमि को बाँटने जैसे अनुच्छेद 370 की समाप्ति हो और वंदे मातरम् का पूर्ण गान हो। भारत एक पुरातन राष्ट्र है, यह पहले से चेतनयुक्त जीवन विद्यमान है। धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष की कल्पना से युक्त सारा एकात्म जीवन दर्शन पर आधारित है। बीच में कुछ विदेशी आक्रमणों के कारण इस राष्ट्र के जीवन में कुछ परिवर्तन आई है।
यह राजनीति और भारतीयकरण का ही परिणाम है कि आज भारतीय जनता पार्टी के अगुवाई में देश आगे बढ़ रहा है। कम्युनिस्ट और सोशलिस्ट पार्टी 1952 में जो लोकसभा चुनाव दूसरे और तीसरे स्थान पर थी, उसका आज अस्तित्व ही नहीं है।

















