पिछले तीन दिनों से चल रहा राजनीतिक घमासान के बीच तीन चुनाव आयुक्तों ने एक साथ बैठकर मीटिंग की और मीडिया में चल रहे मतभेद की अटकलों को विराम दिया। चुनाव के आयुक्तों ने यह स्पष्ट करते हुए बताया कि SIR ( मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण ) सभी फैसले सबके सहमति से ही लिए गए थे।
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त डॉक्टर एस. एस. संधू तथा विवेक जोशी की सहमति से रिलीज प्रेस विज्ञप्ति में बताया कैबिनेट सचिव के बारे में लिखे जा रहे गलत अफवाहों और फार्म छः में संशोधन के बारे में फैलाए जा रहे भ्रमों को दूर किया और उन्होंने यह निश्चित किया कि जितना भी SIR संशोधन के समय नाम कटा है।अधिकारी उनके घर जाकर दस्तावेज कलेक्ट करेंगे।
ये सब विवाद खड़ा होने के बाद पूर्ण चुनाव आयुक्त ने सर्वसम्मति के साथ नौ फैसले लिए, जिसमें से पांच सीधे तौर पर SIR से जुड़ा है और चार फैसले चुनाव आयोग के अपने अंदरूनी मामले। तीनों चुनाव आयुक्तों ने साफ़ किया, 24 जून 2025 को विहार से एसआईआर करने के बाद , अब इसे बंगाल सहित 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में भी कराया जाएगा।
इस फैसले पर सुप्रीम कोर्ट का मुहर 25 मई को ही लग चुकी थी। तीनों चुनाव आयुक्तों ने यह सुनिश्चित किया एसआईआर के बाद मतदाताओं की अंतिम संख्या , 12 राज्यों में चालू प्रक्रिया पूरी हो जाने के बाद ही जारी की जाएगी।
फॉर्म छह में घोषणा पत्र की अनिवार्यता एसआईआर तक सीमित HAIN । नए वोटरों में जो फॉर्म छह को लेकर भ्रांतियां फैली हैं, उसे तीनों आयुक्तों ने स्पष्ट किया नए वोटरों के लिए फॉर्म छह के साथ घोषणा पत्र लेने के कारन एक बड़ी संख्या में युवा पीढ़ी के, मतदाताओं को मतदाता सूची में शामिल न होने की आशंका को भी दूर किया। चुनाव आयुक्त के अनुसार यह व्यवस्था अस्थायी है, जो सिर्फ एसआईआर के लिए ही बनी थी। सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे सही ठहराया। एसआईआर की प्रक्रिया पूरी होने के बाद बनने वाले नए मतदाताओं को यह घोसला पत्र देना अनिवार्य नहीं होगा।
















