देश में चल रहा चुनाव आयोग के विवाद के बीच मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर इलेक्शन कमीशन ने 2 नवंबर से विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) करने की घोषणा की, जिसमें यूपी समेत 17 राज्यों में एसएसआर कराने को कहा। जिसमें से 13 राज्य और तीन केंद्र शासित प्रदेश शामिल हैं, जिसमें से एक असम है, जहां पर एसआईआर पूरा हो गया है। यह पुनरीक्षण अभियान उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, असम, पंजाब, छत्तीसगढ़, गोवा, केरल, तमिलनाडु, मणिपुर, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी, अंडमान व निकोबार द्वीप समूह तथा लक्षद्वीप में आयोजित किया जा रहा है, जिसमें से कुछ राज्यों में एसआईआर चल रहा है और कुछ राज्यों में एसआईआर की प्रक्रिया संपन्न हो चुकी है, जैसे दिल्ली, हरियाणा और महाराष्ट्र।
मौसम से विवादित क्षेत्र जम्मू कश्मीर, लद्दाख और हिमाचल प्रदेश में पुनरीक्षण कार्यक्रम की घोषणा बाद में की जाएगी। इलेक्शन कमीशन स्पष्ट करते हुए कहा – एक जनवरी 2027 को पात्रता तिथि मानी जाएगी अर्थात एक जनवरी तक 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवा, अपना नाम मतदाता सूची में जुड़वाने के लिए पात्र होंगे।
आयोग ने उन राज्यों को भी शामिल किया है, जिन राज्यों में 2027 के विधानसभा चुनाव भी होने वाले हैं, जैसे उत्तराखंड, पंजाब, मणिपुर, उत्तर प्रदेश और गोवा।
SIR और SSR में अंतर।
एसएसआर हर साल होने वाली एक सरल प्रक्रिया है, जिसमें पुरानी मतदाता सूची को ही आधार बनाकर काम किया जाता है। इस प्रक्रिया में बीएलओ घर-घर नहीं जाता, बस कुछ दावे-आपत्ति मांगे जाते हैं। इसमें मुख्य चार डेट होती हैं, एक जनवरी, एक अप्रैल, एक जुलाई और एक अक्टूबर। इन सभी डेट पर जो व्यक्ति 18 वर्ष का हो रहा है, उसका नाम वोटर लिस्ट में शामिल किया जाता है। इस दरम्यान अगर किसी मतदाता की मृत्यु हो गई है या पता बदला है, तो वोटर कार्ड में सुधार भी किया जाता है।

एसआईआर एक व्यापक प्रक्रिया है, इसमें घर-घर जाकर सत्यापन करना होता है। दर्ज की गई जानकारी, जैसे नाम, पता की से जांच करना और बड़े लेवल पर मतदाताओं के आंकड़ों को ऑडिट करना भी शामिल है। इसमें बीएलओ (बूथ लेवल अधिकारी) मतदाता के दिए हुए पते पर जाते हैं और चेक करते हैं कि वह पते पर रहता है या नहीं या फिर कोई नया व्यक्ति उस पते पर रह रहा है।
एसएसआर में कब क्या होता है?
2 नवंबर को पोलिंग स्टेशनों का पुनर्गठन एवं कुछ नए बूथ भी जोड़े जाएंगे।
12 नवंबर को विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण, एसएसआर के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूची जारी होगी और साथ में दावे-आपत्तियां भी दाखिल की जाएंगी।
28 दिसंबर तक इन दावे और आपत्तियों का निस्तारण किया जाएगा।
4 जनवरी 2027 को अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित होगी।
SSR में कुछ महत्वपूर्ण फेर-बदल।
अंतिम मतदाता सूची की सॉफ्टकॉपी मतदाताओं के फोटो के इमेज पीडीएफ प्रारूप में दी जाती थी लेकिन अब यह मतदाताओं के फोटो को रीडेबल पीडीएफ के रूप में उपलब्ध कराई जाएगी।
पहले नाम जोड़ने, हटाने और शोधन से जुड़ी सूचना के रिकॉर्ड को भविष्य में उपयोग के लिए रखा जाता था। इसे किसी भी राजनीतिक दलों के साथ साझा नहीं किया जाता था लेकिन अब यह मान्यता प्राप्त किसी भी राजनीतिक दल के साथ साझा की जाएगी।
पहले चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की नामंकन अंतिम तिथि पर मांग और भुगतान के आधार पर मतदाता सूची की सॉफ्टकॉपी सीडी/डीवीडी के रूप में उपलब्ध कराई जाती थी लेकिन अब किसी पेन ड्राइव या किसी अन्य इलेक्ट्रॉनिक स्टोरेज डिवाइस में उपलब्ध कराई जा सकती है।
मतदाता सूची में पते के लिए अनिवार्य क्षेत्र, जैसे वार्ड नंबर, सड़क, मोहल्ला, गांव, शहर, जिला, राज्य, पिन कोड जो मतदाता के वोटर कार्ड पर और मतदाता सूची दोनों पर अंकित होंगे।
एक ही मकान में रह रहे परिवारों को एक ही सेक्शन में और एक ही मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए फॉर्म 6, व प्रवासी भारतीयों के लिए फॉर्म 6A नाम हटाने या आपत्ति के लिए फॉर्म 7 और सुधार व स्थान परिवर्तन के लिए फॉर्म 8 का उपयोग होगा। इसके लिए आधार कार्ड देना या न देना पूरी तरह आप की इच्छा है और आधार कार्ड न होने पर आवेदन रद्द नहीं किया जाएगा।
किसी भी दावे/आपत्ति पर निर्णय तब तक नहीं लिया जाएगा जब तक हर राजनीतिक दलों को उसकी सूची सौंपे जाने के बाद कम से कम सात दिन की अवधि न बीत चुकी हो।
एक बूथ पर अधिकतम 1200 मतदाता ही होंगे आम नागरिकों के सुविधा को ध्यान में रखते हुए मतदान केंद्रों के नियमों में बड़े बदलाव किए गए हैं आयोग के पूर्व अनुमति के बिना एक पोलिंग स्टेशन पर 1200 से अधिक वोटरों का रजिस्टेशन नहीं किए जाएंगे। साथ ही मतदाताओं को वोट डालने के लिए 2 किलोमीटर से अधिक दूर न हो, और न कोई प्राकृतिक बाधा होनी चाहिए।















